Child Teeth

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बच्चे एवं उनके दूध के दांत

बच्चों के समुचित विकास के लिये स्वस्थ दूध के दांत बहुत आवश्यक है । इनका महत्व ना सिर्फ खाना खाने व बोलने में है बल्कि इनका महत्वपूर्ण कार्य पक्के दांतों के लिए जगह बनाना एवं उन्हें सही स्थान में आने में मदद करना है, दूध के दांतों के नीचे ही पक्के दांत बनते है यदि दूध के दांतों की सही देखभाल की जाए तो पक्के दांतों की अपनी सही जगह आने की संभावनाएं अधिक होती है ।

क्या  आप जानते है ? गर्भ में ही बच्चे के 20 दूध के दांतों का बनना शुरु हो जाता है अत: दांतों का बनना पैदा होने के पूर्व ही शुरु हो जाता है । 4 से 7 माह की उम्र में पहला दांत आता है (अक्सर सामने के दांत .Lower Centra Incisors) 3 साल की उम्र में लगभग सभी दूध के दांत आ जाते है ।

पहली दाढ (6 साल के मोलर) एक सावधानी

6 वर्ष की आयु में फस्ट मोलर दाढ आता है । यह दांत दूध के दांतों के ठीक पीछे आता है । यदि दूध के दांतों में कीड़े हों या वह समय से पहले गिर गए हो तो यह दांत अपनी सही जगह छोड़कर आगे आ जाते हैं अथवा दूध के दांतों में सड़न के कीड़े ले लेते है एवं अन्य पक्के दांतों के लिए जगह कम पड़ जाती है इस कारण अन्य पक्के दांत टेढॆ मेढॆ निकलते हैं । अत:दूध के दांतों की सही देखभाल के लिये फ्लोराइड आवरण चढवाना लाभकारी होता है । यदि फिर भी दूध के दांत गिर जाते हैं तो Space Maintainer  लगवाना, अति आवश्यक है ताकि पक्के दांतों की जगह बची रहे ।

इस दांत को कई बार माता-पिता दूध का दांत सकर इग्नोर कर देते हैं, जो कि सबसे मजबूत एवं अहम् दांत है, लगभग 60 खाना चबाने का कार्य यह अकेला दांत जीवन भर करता है ।

कुछ सामान्यत: पूछे जाने वाले सवाल

बच्चों के दांतों को कब से ध्यान देना चाहिए ?

स्वस्थ्य दांत शुरुआत से ही आवाश्यक है । ओरल केयर बच्चे के जन्म के साथ ही शुरु हो जाता है, हर बार दूध पिलाने के बाद बच्चों के मुंह एवं मसुड़ों को कपड़े से साफ करना चाहिए । पहले दांत के आते ही soft ब्रश में दांतों की सफाई करना माता-पिता द्वारा शुरु कर देना चाहिए

प्रथम बार किस उम्र में बच्चों को  Child Dentists के पास ले जाना चाहिए ?

सामान्यत:बच्चे के प्रथम जन्म दिन में डेन्टिस्ट दांतों में सड़न एवं अन्य बीमारियों का निरीक्षण करते है एवं एक्स-रे के माध्यम से दांतों के कीड़ों के प्रति संवेदन शीलता का पता लगाकर फ्लोराइड करते हैं इससे ना सिर्फ दूध के दांत मजबूत बनते हैं बल्कि पक्के दांत भी अच्छे रहते हैं ।

क्या दांतों के आते समय दर्द होता है ?

हा दांत आते समय मसूड़ों में खुजली, लाल होना व दर्द होना सामान्य है ऎसे में माता को अपनी साफ उंगली शिशु के मसूड़ों पर फिराने से उन्हें राहत मिलती है । भी शिशु को राहत मिलती है,किन्तु उनकी साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए क्योंकि इस समय मसूड़े इन्फेक्शन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं । दांत आते समय बुखार आना व दस्त लगना सामान्य नहीं ऎसा इन्फेकशन होने पर ही होता है । यदि ऎसा होता है तो Child Dentist  की सलाह लेनी चाहिए ।

क्या दूध के दांतों में कीड़े लगते हैं ?

हां दूध के दांतों में कीड़े आसानी से लगते हैं एवं फैलते भी जल्दी हैं अत: जल्द से जल्द ट्रीटमेंट की आवाश्यकता होती है । बेबी बाटल टूथ डिके एक अत्यंत खतरनाक प्रकार की दांतों की सड़न है जिसमें लगभग सारे दूध के दांत कीड़ों की वजह से सड़कर गल जाते हैं इसका इलाज आधुनिक तकनीक द्वारा ही संभव है ।

अंगूठा चूसने से क्या कोई हानि है ?

4 साल तक अंगूठा चूसने से कोई विशेष हानि नहीं है किन्तु इसके पश्य्चात् यदि बच्चा अंगूठा चूसता है तो उसके दांत व चेहरे पर दूरगामी नुकसान होते हैं । यदि 6 साल के बाद भी बच्चा अंगूठा चूसता है तो सायकेटि्रस्ट की सलाह भी आवाश्यक होती है

डेन्टिस्ट दांतों के बचाव के लिए कया करते हैं ?

दांतों की सही सफाई एवं जीवन शेली स्वस्थ दांतों के लिए सबसे अधिक लाभकारी है । फ्लोराइड।चचसपबंजपवद एवं च्पज - थ्पेेनत सीलेन्ट से दांतों की कमजोर जगहों को मजबूत किया जाता है ताकि कीड़े को दांतों में शुरुआती पकड़ ही न मिले एवं स्वस्थ दांत बने रहें ।

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