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आर्थोडान्टिक ट्रीटमेंट क्या है ?
यह Dentistry की एक विशेष ब्रांच है । इसका पूर्ण नाम आर्थोडान्टिक एंड डेन्टो फिशियल आर्थोपैडिक्स है, इसका मुख्य उद्देश्य
- टेढे-मेढे दांत
- विकृत चेहरे छोटे बड़े जबड़े, नाक, होंठ
- कटे-फटे तालू का इलाज करना है
आर्थोडान्टिक ट्रीटमेन्ट क्यों आवाश्यक है ?
आड़े-तिरछे चेहरों एंव दांतों को साफ रखना मुमकिन नहीं होता जिससे दांतों में सड़न,मसूड़ों में सूजन एवं ब्रश करते समय खून आने की परेशानियां होती है ।ऊपर नीचे के दांतों के आपस में सही संतुलन में न होने से दांतों का घिसना एवं खाना चबाने में जबड़ों में दर्द/तकलीफ होती है।Severe Cases में बोलने में एवं कानों के पास भी दर्द होता है ।
40 से 50 वर्ष की आयु में आज के युग में खराब चेहरा व दांत बच्चों के Self-Confidance को कम करता है जिसके दूरगामी परिणाम होते हैं । बहुत सी रिसर्च इस बात को सत्य साबित करती है । Early-Treatment हमेशा ज्यादा लाभकारी होता है ।
डेन्टोफेशियल आर्थोपेडिक्स क्या है ?
यह डेन्टिस्ट्री की वह सुपर स्पेशियलिटी है जो दांतों व चेहरों की विकृतियों की पहचान,रोकथाम एवं निवारण करती है । हडिडयों की Growth एंव आकार की गणना की जाती है । यदि Growth बची हो तो बिना आपरेशन ।
टेढे-मेढे दांत क्यों होते हैं ?
मुख्यत:यह आनुवांशिक कारणों से होती हैं । उदाहरण के लिए दांतों में Crowding,Spacing एंव बाहर निकले हुए दांत चेहरों की विकृतियों जैसे ऊपर के/नीचे के जबड़ों की हडिडयों का बड़ा होना भी आनुवांशिक कारणों से होता है
अंगुठा चूसना 4साल के बाद भी मुंह से सांस लेना दूध के दांतों की देखभाल सही न होना एवं दूध के दांतों का समय से पहले गिर जाना एक्सीडेंट जबड़ों की हडिडयों का टूट जाना होने से भी चेहरे व दांतों की विकृतियों उत्पन्न हो जाती है ।
आनुवांशिक कारणों के साथ अन्य कारण जुड़ जाने से विकृति अधिक बढ जाती है। स्वस्थ पक्के दांतों के लिये स्वस्थ दूध के दांतों का होना आवाश्यक है ।
आर्थोडान्टिक ट्रीटमेंट लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
- ब्रेसेस की सही देखभाल आवाश्यक है,कडे खाने जैसे चना, मूंगफली, ठाफी से ब्रेकैट्स टूटते हैं जो ट्रीटमेंट को धीमा करते हैं । इन्हें सावधानी पूर्वक पीछे के दांतों से खाना चाहिए
- सामने के दांतों से काटना तारों की वजह से कठिन होता है अत: पीछे के दांतों से खाना-खाना चाहिए।
- दांतों की सफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए । खाना-खाने के बाद टूथ ब्रश व माऊथ वाश करना चाहिए ।
- Appointment का विशेष ध्यान रखना चाहिए एवं अपने आथोडान्टिस्ट की बातों का कड़ाई से पालन करना चाहिए ।
- दर्द होने व तारों के चुभने पर ब्रेकेट वेक्स का प्रयोग डाक्टर की सलाह अनुसार करना चाहिए एवं सुविधानुसार Appointment लेकर डाक्टर को अवस्था से अवगत कराना चाहिए । सफल आर्थोडान्टिक ट्रीटमेंट डाक्टर,पेंशेट व उसके माता-पिता के परस्परCo-Operation पर निर्भर करता है ।
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