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ब्रेसेस की कार्यप्रणाली
छोटे-छोटे ब्रेकट्स (Bracket),वायर(Wire) की मदद से दांतों में तनाव उत्पन्न करते हैं जिससे दांतों एवं हडिडयों की Movement होती है आर्थोपैडिक्स ट्रीटमेंट यदि सही समय पर किया जाए तो बिना कोई सर्जरी करे Functional-Appliance की मदद से विकृत चेहरों का इलाज संभव होता है ।यह Appliance नेचुरल ग्रोथ को नियंत्रित करते हैं, जिससे छोट- बडे जबड़े ठीक हो जाते है ।
आर्थोडान्टिक ट्रीटमेंट एवं उनका सही समय
इंडियन आर्थोडाटिक सोसायटी आर्थोडान्टिक चेकअप 7 साल में रिकमेंड करती है । ज्यादातर समस्याओं का इलाज 9-14 वर्ष के बीच होता है इस समय समस्या प्रारंभिक होती है एवं उनके निदान अपेक्षाकृत आसान होते है ।
आज आधुनिक तकनीकों द्वारा हर उम्र में आर्थोडार्न्टिक ट्रीटमेंट संभव है 35-40साल की उम्र में दातों के बीच गेप बढना एक आम परेशानी है जिसका मुख्य कारण मसूड़े की बीमारी पायरिया है जिसे ठीक कर दांतों में ब्रेसेस लगाकर गैपिंग ठीक की जाती है जो पूर्णत: संभव व सुरकक्षित है । आर्थोडाटिक ट्रीटमेंट से मसूड़े स्वस्थ व दांत मजबूत होते है
Indian Dental Association द्वारा रिकमेंटेड टिप्स
- अपने बच्चे के फस्ट बर्थ-डे में डेन्टल चेक-अप का तोहफा दें ।
- 2- 6 महीने में एक बार डेन्टल चेक-अप अवाश्यक् कराएं एवं बीमारी बढने का इंतजार न करें ।
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